तुझसे क्या कहूँ ..........
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साभार मेरी बर्बादी भी यूँ मेरे लिए जश्न है 'नादा उसने कुछ तो मेरी इबादत को नज्र किया *** किस भरोसे सफ़र का अंजाम करोगे नादां तेरे रहनुमां ही तेरे राह के पत्थर बन गए *** वक्त के सैकड़ों इम्तहानों की सिला है'नादाँ' हमें भी ठोकरें खाने की ये अदा आ ही गयी *** हंगामा ये है हमारी आदतें शहर से कुछ जुदा है तहजीब-ए -इंसा यहाँ रस्मों रिवाज़ की बात नही . *** गुजरे दिनों के हर कसक की तसल्ली के लिए आज भी तेरी गली का फेरा अंजाम कर लेते हैं